रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- किताबों के पन्नों में सिमटे विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को जब स्कूली बच्चों ने अपनी कल्पना और नवाचार की डोर से बांधा, तो पीएम श्री गवर्नमेंट नटवर इंग्लिश स्कूल का पूरा परिसर एक जीवंत अनुसंधान केंद्र में तब्दील नजर आया। मौका था पश्चिम भारत विज्ञान मेले के भव्य और गरिमामय आयोजन का, जहां जिले के होनहार छात्र-छात्राओं ने अपनी वैज्ञानिक सोच, तकनीकी दक्षता और अद्भुत रचनात्मकता का ऐसा प्रदर्शन किया कि वहां मौजूद हर कोई उनकी प्रतिभा का कायल हो गया। उत्साह और ऊर्जा से भरे इस शैक्षणिक माहौल में विद्यार्थियों ने यह साबित कर दिखाया कि यदि प्रतिभा को सही मंच और उचित मार्गदर्शन मिले, तो छोटे शहरों के बच्चे भी राष्ट्रीय फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ सकते हैं।
यह प्रतिष्ठित आयोजन छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के विशेष सहयोग तथा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), रायपुर के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। विज्ञान मेले का मुख्य केंद्र बिंदु “Science, Technology and Innovation for a Sustainable and Viksit Bharat” अर्थात् सतत एवं विकसित भारत के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार रखा गया था। इस आयोजन का मूल ध्येय स्कूली स्तर पर ही विद्यार्थियों में व्यावहारिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों से निपटने वाले सक्षम वैज्ञानिक व तकनीक विशेषज्ञ के रूप में तराशना रहा।
कबाड़ से जुगाड़ और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम
मेले में सजे स्टॉल्स पर विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए एक से बढ़कर एक कार्यशील मॉडल्स और प्रोजेक्ट्स रखे गए थे। इन परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, ग्रीन एनर्जी के विकल्प, आधुनिक रोबोटिक्स, सतत विकास और स्मार्ट सिटी मैनेजमेंट से जुड़े संवेदनशील विषयों को बेहद कुशलता से प्रस्तुत किया गया था। सबसे खास बात यह रही कि ये प्रोजेक्ट्स केवल सजावटी प्रदर्शन तक सीमित नहीं थे, बल्कि विद्यार्थियों ने दैनिक जीवन में आने वाली जमीनी समस्याओं के बेहद व्यावहारिक और किफायती वैज्ञानिक समाधान खोजकर दिखाए।
छात्रों ने आगंतुकों और निर्णायकों को अपने मॉडल्स की पूरी कार्यप्रणाली, सर्किट डिजाइनिंग और उनके व्यावहारिक उपयोग के बारे में बहुत ही सहज भाषा में समझाया। ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सोलर और विंड एनर्जी के हाइब्रिड उपयोग से लेकर शहरों में कचरा प्रबंधन और जल संरक्षण की ऑटोमैटिक तकनीकों को देखकर यह साफ महसूस हुआ कि आने वाली पीढ़ी पर्यावरण और विकास के संतुलन को लेकर बेहद संजीदा है।
तीखे तकनीकी सवालों पर बाल वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास
प्रदर्शनी के दौरान पहुंचे मुख्य अतिथियों, शिक्षाविदों और विभिन्न विद्यालयों के वरिष्ठ शिक्षकों ने एक-एक स्टॉल पर जाकर बारीकी से सभी परियोजनाओं का अवलोकन किया। अतिथियों ने विद्यार्थियों की वैज्ञानिक समझ और तार्किक क्षमता को परखने के लिए उनसे प्रोजेक्ट्स से जुड़े कई तीखे और तकनीकी सवाल भी पूछे। नन्हे वैज्ञानिकों ने पूरी निडरता, तार्किक चिंतन और गहरे आत्मविश्वास के साथ उन सभी सवालों के उत्तर दिए, जिससे पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
निरीक्षकों और अतिथियों ने खुले दिल से विद्यार्थियों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों के भीतर छिपी झिझक खत्म होती है। जब कोई छात्र अपने बनाए मॉडल पर सैकड़ों लोगों के सामने संवाद करता है, तो उसके भीतर न केवल प्रस्तुतीकरण कौशल बढ़ता है बल्कि समस्याओं को नए नजरिए से देखने और सुलझाने की क्षमता भी विकसित होती है।
विकसित भारत के निर्माण में नवाचार ही सबसे बड़ा हथियार
कार्यक्रम के मुख्य सत्र के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज की 21वीं सदी पूरी तरह से सूचना, तकनीक और नवाचार की सदी है। किसी भी राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी युवा पीढ़ी विज्ञान के क्षेत्र में कितना मौलिक योगदान दे रही है। इस विज्ञान मेले ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि विकसित भारत का सपना केवल भारी-भरकम संसाधनों और विदेशी तकनीक से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए देश की जमीनी प्रतिभाओं, स्थानीय संसाधनों और स्वदेशी वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
मेले ने विद्यार्थियों को यह गहराई से समझाया कि विज्ञान कोई रटने वाला विषय या चारदीवारी वाली प्रयोगशाला का हिस्सा भर नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को सुगम, सुरक्षित और अधिक मानवीय बनाने का सबसे सशक्त जरिया है। जब बच्चे समाज की समस्याओं को विज्ञान के चश्मे से देखना शुरू करते हैं, तभी नए आविष्कारों की नींव पड़ती है।
सर्वांगीण विकास और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत बुनियाद
पीएम श्री गवर्नमेंट नटवर इंग्लिश स्कूल, रायगढ़ में आयोजित यह पश्चिम भारत विज्ञान मेला केवल एक नियमित शैक्षणिक गतिविधि नहीं रहा, बल्कि यह बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। इस पूरे आयोजन ने विद्यार्थियों में टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, समय प्रबंधन और आत्मनिर्भरता जैसे बुनियादी गुणों को मजबूती से रोपने का काम किया।
मेले के समापन अवसर पर शिक्षकों और आयोजकों ने एक स्वर में कहा कि आज स्कूल की प्रयोगशालाओं में मॉडल्स बना रहे ये नन्हे हाथ ही कल के प्रख्यात इंजीनियर, वैज्ञानिक, चिकित्सक और नीति नियंता बनेंगे। ऐसे प्रेरक और ज्ञानवर्धक आयोजनों की निरंतरता ही रायगढ़ समेत पूरे प्रदेश की प्रतिभाओं को तराशकर एक आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की मजबूत नींव तैयार करेगी।
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