रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- जिले के खरसिया ब्लॉक स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) छोटेमुड़पार में संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों को सेवामुक्त करने का मामला गरमा गया है। विद्यालय में पदस्थ काउंसलर और वार्डन सहित तीन महिला कर्मचारियों ने विद्यालय प्रशासन और आउटसोर्सिंग एजेंसी पर मनमानी का गंभीर आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन के समक्ष न्याय की गुहार लगाई है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी तय सैलरी में से अवैध तरीके से जीएसटी और सर्विस चार्ज के नाम पर हर महीने मोटी रकम काटी जा रही थी। जब उन्होंने इस कटौती के खिलाफ विद्यालय प्रबंधन और कलेक्टोरेट से आई जांच टीम के सामने अपनी आवाज उठाई, तो बदले की भावना से उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वहीं पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए अपर कलेक्टर अपूर्व प्रियेश टोप्पो ने निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

वेतन में कटौती और मनमाने ढंग से सेवामुक्ति का आरोप

पीड़ित कर्मचारी पिंकी वर्मा ने बताया कि वह एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय छोटेमुड़पार में काउंसलर के पद पर कार्यरत थीं। उनका चयन बकायदा इंटरव्यू प्रक्रिया के बाद आउटसोर्सिंग एजेंसी 'सैम ग्रुप ऑफ कॉरपोरेशन' के माध्यम से हुआ था। उन्होंने बताया कि उनका मासिक मानदेय 35,400 रुपये निर्धारित था, लेकिन एजेंसी द्वारा सर्विस चार्ज और जीएसटी के नाम पर लगभग 6 हजार रुपये प्रतिमाह काट लिए जाते थे। इस अनुचित कटौती को लेकर उन्होंने प्राचार्य महोदय के पास शिकायत दर्ज कराई थी और जब कलेक्टोरेट से विद्यालय में जांच टीम पहुंची, तब भी अपनी समस्या रखी। आरोप है कि शिकायत के बाद से ही प्राचार्य का रवैया बदल गया और 31 अक्टूबर को उन्हें अचानक कार्यालय बुलाकर कार्यमुक्त करने का पत्र थमा दिया गया। उनके मुताबिक, सेवामुक्ति से पहले उन्हें कोई नोटिस या स्पष्टीकरण का मौका तक नहीं दिया गया और चयन प्रक्रिया को गलत बताकर नौकरी से निकाल दिया गया।

8 में से 3 पर ही कार्रवाई, उठाए सवाल

विद्यालय में वार्डन के पद पर पदस्थ महिला कर्मचारी ने भी अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनकी नियुक्ति कलेक्टर के अनुमोदन पर नियमानुसार हुई थी। उनकी सैलरी 29,200 रुपये तय थी, जिसमें से 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी की कटौती की जा रही थी। उन्होंने बताया कि नियुक्ति के समय कुल 8 लोग पदस्थ हुए थे, लेकिन सैलरी कटौती की शिकायत उठाने के बाद सिर्फ तीन कर्मचारियों को ही 31 अक्टूबर 2026 को बिना किसी प्री-नोटिस के हटाया गया, जबकि बाकी 5 कर्मचारी अब भी कार्यरत हैं। कर्मचारियों ने इसे सीधे तौर पर आवाज दबाने और बदले की कार्रवाई करार दिया है। पीड़ितों का कहना है कि वे पिछले चार महीनों से ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन अधिकारियों के समक्ष सच बोलने का खामियाजा उन्हें नौकरी गंवाकर भुगतना पड़ा है।

अपर कलेक्टर ने कहा- होगी विस्तृत जांच, दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई

कर्मचारियों की लिखित शिकायत और पूरे घटनाक्रम पर रायगढ़ जिले के अपर कलेक्टर अपूर्व प्रियेश टोप्पो ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि विद्यालय के कुछ कर्मचारियों ने आवेदन देकर बिना किसी पूर्व नोटिस के पद से पृथक किए जाने और वेतन से टैक्स कटौती की शिकायत दर्ज कराई है। अपर कलेक्टर ने बताया कि प्रशासन इस पूरे मामले को लेकर संबंधित विभाग से विस्तृत जानकारी तलब कर रहा है। इस बात की बारीकी से पड़ताल की जाएगी कि कर्मचारियों की नियुक्ति किन नियमों और आदेशों के तहत हुई थी, उनकी सैलरी से किस आधार पर कटौती की गई और उन्हें किस आदेश से सेवामुक्त किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी विभाग, कर्मचारी या संबंधित अधिकारी द्वारा गलत तरीके से आदेश पारित करना या अनियमितता बरतना पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विधिवत जांच कर सख्त कदम उठाए जाएंगे और मामले का न्यायसंगत समाधान किया जाएगा।