रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- देश जब सत्य, अहिंसा और स्वाधीनता के अमर पुरोधा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें नमन कर रहा था, ठीक उसी वक्त संस्कारधानी रायगढ़ के हृदयस्थल पर स्थापित गांधी प्रतिमा अपनी ही उपेक्षा पर मौन आंसू बहाती नजर आई। प्रतिवर्ष जिस गांधी चौक पर 2 अक्टूबर को आस्था, सम्मान और भव्य आयोजनों की रौनक बिखरी रहती थी, इस बार वहां पसरा सन्नाटा और बिखरी अव्यवस्था नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सीधा तमाचा बनकर उभरी। शहर सरकार की विफलता का आलम यह रहा कि बापू की प्रतिमा के इर्द-गिर्द न तो बुनियादी साफ-सफाई की दरकार समझी गई और न ही इस ऐतिहासिक दिन के सम्मान में रोशनी या सजावट का कोई पुख्ता इंतजाम किया गया। इस घोर लापरवाही ने शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विपक्ष को आक्रोश की आग में झोंक दिया है।
स्वच्छता के प्रणेता की प्रतिमा के पास पसरी गंदगी, कागजों में सिमटी शहर सरकार की सक्रियता..
जिस महामानव ने समूचे विश्व को स्वच्छता और सादगी का पाठ पढ़ाया, उसी राष्ट्रपिता की जयंती पर उनके अपने चौक का ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य पहले कभी नहीं देखा गया। बापू की आदमकद प्रतिमा के चारों ओर धूल और कचरे के ढेर यह बताने के लिए काफी थे कि नगर निगम का सफाई महकमा केवल बैठकों और कागजी दावों तक ही सीमित रह गया है। न प्रतिमा की विधिवत धुलाई हुई, न परिसर को संवारा गया और न ही शाम ढलने पर श्रद्धा के दो दीप जलाने लायक रोशनी की व्यवस्था की गई। अंधेरे के आगोश में डूबे चौक को देखकर वहां से गुजरने वाले हर संवेदनशील नागरिक का मन खिन्न हो गया। लोगों का कहना है कि जब शहर के मुख्य चौराहे और राष्ट्रपिता के स्मारक की यह दुर्दशा है, तो फिर निगम के बाकी स्वच्छता अभियानों की असलियत क्या होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
प्रबुद्ध वर्ग का तीखा प्रहार: ‘गोडसे को आदर्श मानने वाली सत्ता से सम्मान की उम्मीद ही बेमानी’
गांधी चौक की इस उपेक्षा पर शहर के प्रबुद्ध और सामाजिक जगत से जुड़े लोगों ने शासन-प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए बेहद कड़े शब्दों में निंदा की है। सामाजिक प्रतिनिधियों ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस राजनीतिक धारा में नाथूराम गोडसे को आदर्श के रूप में महिमामंडित करने की प्रवृत्ति छिपी हो, उस सत्ता और उसके इशारे पर चलने वाले तंत्र से महात्मा के सम्मान की अपेक्षा करना ही बेमानी है। लोगों ने दो टूक कहा कि राजनीतिक विचारधारा चाहे जो भी हो, लेकिन जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और संवैधानिक पदों पर बैठे जिम्मेदारों का यह कर्तव्य था कि वे राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रपिता की मर्यादा का ख्याल रखते। प्रशासनिक अधिकारियों की इस घोर संवेदनहीनता ने यह साबित कर दिया है कि उनके भीतर राष्ट्रीय पर्वों और महापुरुषों के प्रति कोई वास्तविक निष्ठा बाकी नहीं रह गई है।
नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया का तीखा हमला: ‘वर्तमान सरकार और संबंधित विभाग पूरी तरह संवेदनहीन’
इस पूरे शर्मनाक घटनाक्रम पर रायगढ़ नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सलीम नियारिया ने मौजूदा सरकार और स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए तीखा हमला बोला है। नियारिया ने कड़े लहजे में कहा कि वर्तमान सरकार, पुलिस महकमा, नगर निगम और संबंधित विभाग पूरी तरह से गैर-जिम्मेदार और संवेदनहीन हो चुके हैं। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सत्ता के दबाव और अपनी सुस्ती के चलते पूरा अमला राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का गरिमापूर्ण सम्मान करने में भी नाकाम साबित हुआ है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 2 अक्टूबर केवल एक औपचारिक तारीख नहीं, बल्कि देश की अंतरात्मा का दिन है, लेकिन रायगढ़ में प्रशासन ने जिस तरह बापू के चौक को उपेक्षित छोड़ दिया, वह अक्षम्य है। यह लापरवाही केवल एक चूक नहीं, बल्कि राष्ट्र के पिता का सीधा अपमान है, जिसे शहर की जागरूक जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
चौक पर छाया यह सन्नाटा अब शहर की गलियों में गरमाते राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश में तब्दील हो चुका है। लोग अब सीधे सवाल पूछ रहे हैं कि क्या रायगढ़ का प्रशासनिक अमला इतना निरंकुश और बेपरवाह हो गया है कि उसे देश के राष्ट्रपिता के सम्मान का भी ध्यान नहीं रहा?
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