रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की तारापुर ग्राम पंचायत का सियासी ड्रामा आखिरकार एक धमाकेदार और सनसनीखेज मोड़ पर आकर थम गया है। सत्ता की मलाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ बगावत का परचम बुलंद करने वाले उपसरपंच राजीव डनसेना ने वो कर दिखाया, जिसकी गूंज अब पूरे जिले के राजनीतिक गलियारों में सुनाई दे रही है। सरपंच डिग्री लाल सिदार के खिलाफ लाया गया बहुचर्चित अविश्वास प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हो गया है, जिसके साथ ही डिग्री लाल सिदार की सरपंची का बोरिया-बिस्तर बंध चुका है। यह लड़ाई सिर्फ एक कुर्सी की नहीं थी, बल्कि यह तानाशाही और जनभावनाओं के बीच का वो खूनी संघर्ष था, जहां खाकी और सत्ता के गठजोड़ को आखिरकार जनता और लोकतंत्र के आगे झुकना ही पड़ा।
सत्ता का अहंकार और प्रशासनिक सुस्ती की पराकाष्ठा..
तारापुर पंचायत में सुलग रही असंतोष की चिंगारी तब शोला बन गई जब उपसरपंच राजीव डनसेना के नेतृत्व में आठ पंचों ने सरपंच डिग्री लाल सिदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। महीनों तक फाइलें एसडीएम कार्यालय के ठंडे बस्ते में धूल फांकती रहीं। जनप्रतिनिधियों की जायज शिकायतों पर प्रशासन की इस आपराधिक चुप्पी ने साफ कर दिया था कि भ्रष्ट व्यवस्था को बचाने के लिए पर्दे के पीछे ताकतें काम कर रही हैं। जब पानी सिर से ऊपर निकल गया, तब इन जनप्रतिनिधियों को न्याय की गुहार लगाने के लिए कलेक्टर जनदर्शन के दरबार में दस्तक देनी पड़ी। तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी और 10 तारीख को मतदान की मुहर लगी।
साजिश के तहत गिरफ्तारी: जन्माष्टमी की रात रची गई गंदी राजनीति..
लेकिन जब खेल लोकतांत्रिक तरीके से जीतने की उम्मीद खत्म होने लगी, तो सत्तापक्ष ने हथकंडे बदलने में देर नहीं लगाई। मतदान से ठीक पहले, जन्माष्टमी की पावन रात को एक ऐसा सियासी भूचाल आया जिसने सबको झकझोर कर रख दिया। सरपंच डिग्री लाल सिदार के इशारे पर कोतरा रोड थाना पुलिस ने आधी रात को उपसरपंच राजीव डनसेना को एससी-एसटी एक्ट के झूठे और मनगढ़ंत मामलों में दबोच लिया। एक जनप्रतिनिधि को अपराधी की तरह हथकड़ियों में जकड़कर जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। यह चाल थी कि राजीव डनसेना टूट जाएंगे, उनकाौसला पस्त हो जाएगा और अविश्वास प्रस्ताव का कोरम बिखर जाएगा।
जब सड़कों पर उतरा जनसैलाब, थर्राया पुलिस प्रशासन..
मगर हुक्मरानों का यह घिनौना षड्यंत्र उनके ही गले की फांस बन गया। राजीव डनसेना की गिरफ्तारी की खबर जंगल की आग की तरह तारापुर में फैली और देखते ही देखते कोतरा रोड थाने के बाहर हजारों ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। पुलिस की तानाशाही के खिलाफ जनता का गुस्सा ऐसा फूटा कि प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। मामले की गंभीरता को भांपते हुए खरसिया क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक उमेश पटेल स्वयं थाने पहुंचे और कार्यकर्ताओं के साथ मोर्चा संभाल लिया। थाने के बाहर गरमाए माहौल और जनता के उग्र तेवरों के आगे पुलिस और प्रशासन को झुकना पड़ा, हालांकि तब तक राजीव को तीन दिनों की अवांछित जेल यात्रा झेलनी पड़ चुकी थी।
जेल की सलाखों से सीधा सिंहासन तक: जनता ने दिया करारा जवाब..
तीन दिनों की प्रताड़ना और जेल की कालकोठरी काटकर जब राजीव डनसेना गांव लौटे, तो उनका स्वागत किसी राजा की तरह हुआ। जनता ने समझ लिया था कि यह अत्याचार उनके लोकप्रिय नेता पर नहीं, बल्कि तारापुर की आवाम के हक पर हमला है। जेल से लौटने के ठीक अगले दिन जब अविश्वास प्रस्ताव की अग्निपरीक्षा हुई, तो परिणाम ने विरोधियों के होश उड़ा दिए। राजीव डनसेना और उनके खेमे के आठों पंचों ने एकजुट होकर ऐसा प्रहार किया कि सरपंच डिग्री लाल सिदार का सिंहासन ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। अविश्वास प्रस्ताव की इस ऐतिहासिक जीत ने साबित कर दिया कि झूठे मुकदमों और पुलिसिया तंत्र से जनसमर्थन को नहीं कुचला जा सकता।
अब नए सवेरे की तलाश में तारापुर, विकास के पथ पर बढ़ेगी रफ्तार..
जेल से वापसी के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में अजेय योद्धा बने राजीव डनसेना ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह जीत उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि तारापुर के हर उस नागरिक की जीत है जिसने जुल्म के खिलाफ सीना तानकर खड़े रहना सीखा। उन्होंने ऐलान किया है कि अब प्रतिशोध की राजनीति को दरकिनार कर उनका एकमात्र एजेंडा गांव का चौमुखी विकास होगा। कल से ही पंचायत के रुके हुए विकास कार्यों को युद्ध स्तर पर गति दी जाएगी ताकि तारापुर की जनता को बुनियादी सुविधाएं और न्याय मिल सके।
बहरहाल, तारापुर की इस राजनीतिक उठापटक ने यह साफ कर दिया है कि अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, जनशक्ति के आगे उसकी उम्र हमेशा छोटी होती है। अब निगाहें नए सरपंच के चुनाव पर टिकी हैं, लेकिन यह तय है कि इस सियासी संग्राम ने तारापुर के राजनीतिक इतिहास में एक ऐसी इबारत लिख दी है जिसे आने वाली पीढ़ियां लंबे समय तक याद रखेंगी।
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