रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- जिले में बोईदादर मार्ग पर स्थित वन विभाग का चेकपोस्ट इन दिनों कानून के पहरे की जगह अवैध वसूली की खुली मंडी बन चुका है। रविवार की शाम इस नाके पर जो कुछ हुआ, उसने सरकारी मुलाजिमों की कार्यशैली और प्रशासनिक साख पर कालिख पोत दी है। सरकारी कुर्सी पर बैठकर जनता के टैक्स से पगार लेने वाले कर्मचारी जब सरेआम रंगदारी पर उतर आएं, तो समझ लेना चाहिए कि व्यवस्था किस कदर सड़ चुकी है। कागजों पर वैध सील-मुहर लगाने की एक सामान्य सी प्रक्रिया को यहां मोटी काली कमाई का जरिया बना दिया गया है। जब मेहनत-मजदूरी कर पेट पालने वाले बेबस ट्रेलर चालकों ने इस अनैतिक वसूली के आगे झुकने से इनकार कर दिया, तो खाकी और कलम के नशे में चूर कर्मचारी ने सारी मर्यादाएं तार-तार करते हुए बीच सड़क पर गुंडागर्दी का नंगा नाच शुरू कर दिया।

शाम ढलते ही शुरू हुआ खुली लूट का खेल..

यह सनसनीखेज मामला रविवार शाम करीब 5:30 बजे का है, जब ओडिशा की सीमा से एमएसपी कंपनी के लिए भारी मात्रा में कोयला लोड कर दो ट्रेलर तय मार्ग से बोईदादर चेकपोस्ट पर पहुंचे। नियमानुसार चालकों ने वाहनों को रोका और अपने पूरे वैध दस्तावेजों पर वन विभाग की अधिकृत मोहर लगवाने के लिए दफ्तर के भीतर कदम रखा। लेकिन दफ्तर में कागजों की जांच की जगह सीधे गैर-कानूनी रुपयों की मांग रख दी गई। टेबल पर बैठे कर्मचारी ने बिना किसी वैध रसीद के सीधी 'एंट्री फीस' मांगी। चालकों ने जब इसका कड़ा विरोध किया और बिना रसीद के एक भी धेला देने से मना कर दिया, तो कुर्सी पर बैठा मुलाजिम आपे से बाहर हो गया और सरकारी दफ्तर किसी रंगदारी के अड्डे में तब्दील हो गया।

शराब के नशे में चूर उपाध्याय बाबू की बदतमीजी, वाहन पर चढ़कर छीनी चाबी..

प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित चालकों का आरोप है कि चेकपोस्ट पर तैनात संबंधित बाबू शराब के भारी नशे में मदहोश था। रुपये न मिलने की खीझ में उसने सारी हदें पार करते हुए चालकों पर गालियों की बौछार कर दी। बात सिर्फ अपशब्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने जबरन चालकों के हाथ से गाड़ी के जरूरी दस्तावेज छीन लिए। कर्मचारी की दबंगई इस कदर हावी थी कि उसने चालक की जेब में हाथ डालकर उसका मूल ड्राइविंग लाइसेंस तक जबरन निकाल लिया। इसके बाद हद तब पार हो गई जब नशे में लड़खड़ाता यह कर्मचारी ट्रेलर पर चढ़ गया और वाहन की चाबी छीनने का प्रयास करने लगा। इस खुलेआम बदसलूकी और तांडव से मौके पर अफरातफरी मच गई और नाके पर भारी तनाव की स्थिति निर्मित हो गई।

ट्रांसपोर्टरों में सुलग रहा आक्रोश, जांच के आश्वासन पर टिकी नजरें..

सड़क पर सरेआम हुई इस शर्मनाक घटना के बाद जिले भर के ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों में वन विभाग के इस भ्रष्ट रवैये के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश भड़क उठा है। चालकों का दो टूक कहना है कि चेकपोस्ट अब सुरक्षा या नियम पालन का जरिया नहीं, बल्कि संगठित लूट का अड्डा बन चुका है। मामला तूल पकड़ते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की भनक लगते ही वन विभाग के आला अधिकारियों ने कहा है कि विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कठोर निलंबन और दंडात्मक कार्रवाई का दावा किया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस वर्दीधारी रंगदारी पर असल में कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर हमेशा की तरह मामले को जांच की फाइलों में दबा दिया जाएगा।