रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड अंतर्गत ग्राम रेंगालपाली में बना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नवनिर्मित भवन इन दिनों भारी चर्चा और सवालों के घेरे में है। महज आठ महीने पहले बड़े धूमधाम और प्रशासनिक तामझाम के साथ जिस सर्वसुविधायुक्त विद्यालय भवन का लोकार्पण किया गया था, वह अब पहली ही बरसात और मामूली समय में दम तोड़ता नजर आ रहा है। एक करोड़ इक्कीस लाख सोलह हजार रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुआ यह भवन अब अपनी घटिया निर्माण गुणवत्ता की गवाही खुद दे रहा है। करोड़ों की लागत से तैयार इमारत की दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें साफ उभर आई हैं और छत से पानी का रिसाव शुरू हो चुका है, जिससे न केवल शासन के विकास के दावों की हवा निकल गई है, बल्कि यहां पढ़ने वाले सैकड़ों नौनिहालों की सुरक्षा पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

लोकार्पण के वक्त हुआ था 'विकसित भारत' की मजबूत नींव का बखान..

गौरतलब है कि इस नव-निर्मित भवन का भव्य लोकार्पण प्रदेश के वित्त मंत्री एवं स्थानीय विधायक ओ.पी. चौधरी द्वारा किया गया था। उस दौरान आयोजित बड़े कार्यक्रम में इसे आधुनिक शैक्षणिक मानकों का आदर्श मॉडल बताया गया था। दावा किया गया था कि 9 सुसज्जित कक्षाओं, अत्याधुनिक स्मार्ट क्लास, दो वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं, समृद्ध लाइब्रेरी और छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग प्रसाधन कक्षों से युक्त यह परिसर 300 से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य को संवारेगा। वित्त मंत्री ने मंच से कहा था कि उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही उन्नत समाज और विकसित भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने एचडीएफसी बैंक के सीएसआर सहयोग का आभार जताते हुए क्षेत्र में हो रहे ऐतिहासिक विकास कार्यों की जमकर सराहना की थी। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता अमित कश्यप ने भी लागत और तकनीकी खूबियों का ब्योरा पेश किया था। उस वक्त पूर्व विधायक विजय अग्रवाल, पुसौर जनपद अध्यक्ष हेमलता चौहान, हेमालिनी गुप्ता और नगर पंचायत अध्यक्ष मानी सतपथी सहित पूरा अमला मंच साझा कर रहा था, लेकिन किसी ने यह कल्पना नहीं की थी कि यह 'मजबूत नींव' आठ महीने में ही दरकने लगेगी।

महज 8 महीने में जर्जर होने लगी इमारत, निर्माण एजेंसी और अफसरों पर उठे सवाल..

लोकार्पण की चमक फीकी पड़ते ही इमारत की कड़वी हकीकत सामने आ गई है। दीवारों में आई गहरी दरारें और छत से टपकता पानी यह चीख-चीख कर बयां कर रहा है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मापदंडों और गुणवत्ता की किस कदर अनदेखी की गई है। सवाल यह उठता है कि जब ठेकेदार इस भवन को खड़ा कर रहा था, तब निगरानी का जिम्मा संभालने वाले जिम्मेदार इंजीनियर और विभागीय अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या अधिकारियों ने आंख मूंदकर फाइलों पर हस्ताक्षर किए और कमीशनखोरी के खेल में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया गया? बिना उचित भौतिक सत्यापन और गुणवत्ता परीक्षण के ऐसे घटिया निर्माण को पूर्णता प्रमाण पत्र कैसे दे दिया गया, यह अपने आप में एक बड़ा प्रशासनिक सवाल है।

मामले में बोले जिला शिक्षा अधिकारी: BEO से कराएंगे जांच, दोषी एजेंसी पर होगी सख्त कार्रवाई..

इस पूरे गंभीर और संवेदनशील मामले में जब रायगढ़ के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) श्यामानन्द साहू से सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच और कार्रवाई की बात कही।

डीईओ श्यामानन्द साहू ने कहा, "रेंगालपाली हायर सेकेंडरी स्कूल के निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर जो बातें सामने आई हैं, उस संबंध में ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (BEO) को मौके पर भेजकर विस्तृत जांच कराई जाएगी। निर्माण एजेंसी कौन है, इसका पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद और वस्तुस्थिति स्पष्ट होने पर नियमानुसार उच्च कार्यालय को पत्राचार कर निर्माण एजेंसी के खिलाफ उचित और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।"

क्या ठेकेदार पर दर्ज होगी FIR या रफा-दफा हो जाएगी फाइल?

शिक्षा के मंदिर में हुआ यह घटिया निर्माण केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन से सीधे तौर पर खिलवाड़ है। करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन का इस तरह दुरुपयोग होने के बाद अब जनता और अभिभावकों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या सिर्फ जांच समितियों का गठन कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या फिर दोषी ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और लापरवाह तकनीकी अफसरों पर भी गाज गिरेगी? यह देखना आने वाले दिनों में बेहद अहम होगा।