रायगढ़/लारा@TAKKAR न्यूज :- छत्तीसगढ़ के ऊर्जांचल कहे जाने वाले रायगढ़ जिले के एनटीपीसी (NTPC) लारा संयंत्र का मुख्य प्रवेश द्वार इस वक्त न्याय की आस में बैठे एक अंचल के आक्रोश का केंद्र बन गया है। एक तरफ घर के इकलौते कमाऊ चिराग की संदेहास्पद मौत का मातम है, तो दूसरी तरफ प्रबंधन की संवेदनहीनता और लीपापोती के खिलाफ ग्रामीणों और परिजनों का ऐसा सैलाब उमड़ा है, जिसने महाप्रलय जैसी स्थिति पैदा कर दी है। ड्राइवर देवेंद्र साव की मौत कोई साधारण सड़क हादसा नहीं, बल्कि एनटीपीसी के रसूखदार अधिकारियों की करतूत और प्रबंधन की घोर लापरवाही का एक काला अध्याय है, जिसे अब और छिपाया नहीं जा सकता।
क्या है वह काली रात का खौफनाक सच?
प्राप्त अंदरूनी सूत्रों और सनसनीखेज खुलासों के मुताबिक, त्रिवेदी कॉन्ट्रैक्शन के जरिए चलने वाली स्कॉर्पियो गाड़ी में एनटीपीसी लारा के कुछ बड़े अधिकारी सवार होकर रायपुर एयरपोर्ट गए थे। वापसी के दौरान सराईपाली रोड पर यह वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस गंभीर हादसे में वाहन चालक देवेंद्र साव की दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन इसके बाद जो हुआ वह किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है और सीधे तौर पर एनटीपीसी अधिकारियों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद अज्ञात एनटीपीसी अधिकारी अपनी जान बचाकर और घायल ड्राइवर को तड़पता हुआ छोड़कर मौके से फरार हो गए। एक इंसान को मरने के लिए सड़क पर छोड़ देने वाले इन तथाकथित उच्चाधिकारियों की यह कायराना हरकत मानवता को शर्मसार करने वाली है। यदि अधिकारी सुरक्षित थे, तो वे मौके से भागे क्यों? क्या गाड़ी में कोई अवैध गतिविधि चल रही थी या फिर नशे में गाड़ी चलाई जा रही थी? इन तमाम सवालों के घेरे में अब सीधे तौर पर एनटीपीसी लारा का प्रबंधन आ गया है।
न्याय की भीख मांगते परिजन और प्रबंधन का मौन
घटना के बाद से मृतक देवेंद्र साव के घर में कोहराम मचा हुआ है। घर का इकलौता सहारा छिन जाने के बाद परिवार सड़क पर आ गया है, लेकिन दूसरी ओर एनटीपीसी प्रबंधन के चेहरे पर शिकन तक नहीं है। अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने में माहिर एनटीपीसी प्रबंधन ने इस पूरे मामले में चुप्पी साध ली है, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। आक्रोशित परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने न्याय की जिद ठानते हुए देवेंद्र का शव सीधे एनटीपीसी लारा के मुख्य द्वार पर रख दिया और अनिश्चितकालीन महा-धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारी सामने आकर लिखित में ठोस मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार और इस पूरे हादसे की उच्चस्तरीय सीबीआई या न्यायिक जांच के आदेश नहीं देते, तब तक शव को वहां से नहीं हटाया जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्रों में मौत के सौदागर बने ठेका प्रबंधक और एनटीपीसी
यह घटना कोई अकेली बानगी नहीं है, बल्कि रायगढ़ और लारा क्षेत्र के बड़े-बड़े औद्योगिक संयंत्रों में पनप रही उस लाचारी और शोषण की दास्तान है, जहां मजदूरों की जान की कीमत महज कागजी आंकड़ों से ज्यादा कुछ नहीं है। त्रिवेदी कॉन्ट्रैक्शन जैसी एजेंसियों के माध्यम से गरीब चालकों और श्रमिकों का मानसिक व शारीरिक शोषण किया जाता है और जब कोई बड़ी अनहोनी होती है, तो प्रबंधन अपनी कारपोरेट ताकत के बल पर मामले को दबाने की कोशिश में जुट जाता है। एनटीपीसी जैसे महारत्न संस्थान के परिसरों में यदि इस तरह से अधिकारियों की लपरवाही से गरीब मजदूरों की जान जाएगी, तो आम जनता का सिस्टम से भरोसा उठना लाजिमी है। क्या एनटीपीसी के इन लापरवाह अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी? क्या एक गरीब ड्राइवर की जिंदगी की कोई कीमत नहीं है?
प्रशासनिक अमला तैनात, पर हालात तनावपूर्ण
एनटीपीसी गेट के सामने चल रहे इस उग्र प्रदर्शन के बाद पूरे औद्योगिक क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नुमाइंदे मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने के नाकाम प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जनता के दिलों में सुलग रही आग अब इतनी आसानी से शांत होने वाली नहीं है। लोगों में इस बात का जबरदस्त आक्रोश है कि एक तरफ अधिकारी अपनी अय्याशी और लापरवाह दौरों के चलते हादसे को अंजाम देते हैं, और दूसरी तरफ गरीब का परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होता है। समाचार लिखे जाने तक धरना पूरी ताकत के साथ जारी है और एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी से पूरा लारा क्षेत्र गूंज रहा है। अगर समय रहते प्रबंधन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो यह जनसैलाब किसी बड़े विद्रोह का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एनटीपीसी लारा प्रबंधन की होगी।
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