रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- औद्योगिक जिले रायगढ़ में एक बार फिर नए उद्योग की स्थापना को लेकर बगावत के सुर तेज हो गए हैं। मेसर्स सिंघल स्टील प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पतरापाली, कोतरलिया और सियारपाली क्षेत्र में एक विशाल ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है। इस नए प्लांट की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए आगामी 6 जुलाई सोमवार को जनसुनवाई तय की गई है। लेकिन, केलो नदी को प्रदूषित करने के मामले में कंपनी के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए आसपास के करीब 20 गांवों के ग्रामीणों ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और वे इसके सख्त विरोध में उतर आए हैं।
क्या है कंपनी का प्रस्तावित मेगा प्रोजेक्ट?
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 2006 की अधिसूचना के तहत कंपनी ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल में जो आवेदन किया है, उसके अनुसार यह एक बेहद विशाल एकीकृत स्टील प्लांट होगा। इस वृहद प्रोजेक्ट में 17 लाख टीपीए क्षमता की मुख्य स्टील निर्माण इकाई के साथ-साथ 12 लाख टीपीए का पेलेट प्लांट और 6 लाख टीपीए की कोल वाशरी स्थापित की जाएगी। इसके अलावा कंपनी 160 मेगावाट क्षमता का एक नया पावर प्लांट भी लगाने जा रही है। इस पूरे प्रोजेक्ट में कोक ओवन, सिंटर प्लांट, कोल गैसीफायर, ऑक्सीजन व नाइट्रोजन यूनिट और ईंट निर्माण इकाई जैसी कई अन्य भारी औद्योगिक संरचनाएं भी शामिल हैं, जो इस इलाके का पूरा भूगोल बदल कर रख देंगी।
सांसों पर संकट और हवा में जहर का खौफ..
इस प्रस्तावित प्लांट को लेकर ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता हवा में घुलने वाला जहर है। उनका स्पष्ट कहना है कि रायगढ़ जिले में पहले से ही 100 से अधिक बड़े उद्योग संचालित हैं, जिनके धुएं और कचरे ने पूरी खेती-बाड़ी को चौपट कर दिया है और यहां सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि रायगढ़ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) मानक स्तर से तीन गुना अधिक रहता है। ऐसे में नए पावर प्लांट, कोक ओवन और कोल वाशरी से उड़ने वाली फ्लाई ऐश, सल्फर डाइऑक्साइड और कोयले की धूल इस इलाके को पूरी तरह से गैस चैंबर में तब्दील कर देगी।
खेत छिनने का डर और रोजगार में छलावा..
पर्यावरण के साथ-साथ ग्रामीणों को अपनी रोजी-रोटी छिनने का भी गहरा खौफ सता रहा है। इस नए ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के लिए मुख्य रूप से पतरापाली, कोतरलिया और सियारपाली के किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण होना है। इस क्षेत्र की बड़ी आबादी का जीवनयापन मुख्य रूप से धान की खेती, मौसमी सब्जियों के उत्पादन और महुआ संग्रहण पर टिका है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि औद्योगीकरण के नाम पर यहां केवल छलावा हुआ है। पुराने उद्योगों में भी स्थानीय युवाओं को सिर्फ दिहाड़ी मजदूरी के लायक समझा गया, जबकि स्थायी और अच्छे वेतन वाले पदों पर बाहरी लोगों को बैठा दिया गया।
कब और कहां होनी है जनसुनवाई?
इन तमाम चिंताओं और भारी विरोध के बीच अब सबकी निगाहें 6 जुलाई को होने वाली लोक सुनवाई पर टिकी हैं। यह जनसुनवाई सोमवार सुबह 11 बजे से पतरापाली (पूर्व) स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय के सामने वाले मैदान में आयोजित की जाएगी। अब यह देखना बेहद अहम होगा कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन आक्रोशित ग्रामीणों के इन सुलगते सवालों और प्रदूषण की गहरी चिंताओं का क्या और कैसे समाधा न निकालते हैं।
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