रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और सीमावर्ती जिले रायगढ़ में परिवहन विभाग के उड़नदस्ते की कार्यप्रणाली एक बार फिर जनचर्चा और विवादों के केंद्र में आ गई है। नेशनल हाईवे और प्रमुख राज्य मार्गों पर भारी मालवाहक वाहनों की सतत जांच के नाम पर चल रही धरपकड़ के बीच चालकों की बेबसी और मैदानी अमले के कथित कड़े रवैये ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा घटनाक्रम धरमजयगढ़ और पत्थलगांव के सीमावर्ती इलाके का है, जहां लंबी दूरी तय कर रहे एक मालवाहक ट्रक को रोककर की गई कार्रवाई के बाद चालक का वीडियो बयान सोशल और मुख्यधारा मीडिया में तेजी से प्रसारित हो रहा है। जहां एक ओर पीड़ित चालक ने कैमरे के सामने आकर उड़नदस्ते के कर्मियों पर सीधे 25 हजार रुपये की अनुचित मांग करने तथा मना करने पर 72 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोक देने की धमकी का सीधा आरोप मढ़ा है, वहीं दूसरी ओर रायगढ़ आरटीओ उड़नदस्ता प्रभारी ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल और केवल नियम विरुद्ध परिचालन पर की गई विधिसम्मत कार्रवाई करार दिया है।

सीमावर्ती मार्ग पर मालवाहक की घेराबंदी, गुमला से बिलासपुर जा रहे वाहन को रास्ते में रोका..

प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारखंड के गुमला जिले से मवेशी आहार के रूप में उपयोग होने वाली खली लोड कर एक भारी मालवाहक ट्रक बिलासपुर की ओर रवाना हुआ था। लंबी दूरी और पथरीले रास्तों का सफर तय करते हुए जब यह वाहन पत्थलगांव-धरमजयगढ़ के मध्य पड़ने वाले मार्ग से गुजर रहा था, तभी वहां पहले से मौजूद आरटीओ उड़नदस्ते के जांच दल ने अचानक वाहन को रुकने का इशारा किया। वाहन चालक ने गाड़ी को सड़क किनारे खड़ा कर दिया, जिसके बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। चालक का आरोप है कि अमले ने सामान्य दस्तावेजी पड़ताल करने के बजाय शुरुआत से ही दबाव बनाने वाला रुख अख्तियार कर लिया। घंटों तक वाहन को सुनसान मार्ग पर रोके रखने के कारण चालक मानसिक रूप से परेशान होने लगा। चालक का कहना है कि जब उसने गाड़ी रोकने और आगे न जाने देने का ठोस कारण जानना चाहा, तो अमले की ओर से संतोषजनक उत्तर देने के बजाय मामले को सीधे लेनदेन की तरफ मोड़ने की कोशिश की गई।

कैमरे पर छलका बेबस चालक का दर्द: 25 हजार की कथित मांग और 72 हजार के चालान का दबाव..

घटना के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान भारी मन और तल्ख शब्दों में चालक ने आपबीती सुनाई। चालक ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाते हुए कहा कि जांच स्थल पर मौजूद उड़नदस्ते के कर्मचारियों ने उससे सीधे 25,000 रुपये नगद देने की अनुचित मांग रखी। चालक का कहना था कि वह महज एक साधारण वेतनभोगी ड्राइवर है, जो दिन-रात पहिया घुमाकर अपने परिवार का पेट पालता है, ऐसे में इतनी बड़ी रकम मौके पर दे पाना उसके लिए किसी भी सूरत में संभव नहीं था। चालक का दावा है कि जब उसने हाथ जोड़कर यह राशि देने में असमर्थता व्यक्त की, तो अमले के तेवर और सख्त हो गए। कर्मचारियों ने कथित तौर पर उसे धमकाते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि यदि उसने 25 हजार रुपये का बंदोबस्त नहीं किया, तो उसकी गाड़ी पर सीधे 72 हजार रुपये का भारी चालान काट दिया जाएगा। चालक का आरोप है कि भारी जुर्माने का ऐसा भय दिखाया जाता है जिससे सामान्य वाहन चालक घबरा जाएं और किसी भी तरह समझौते की राह तलाशने पर मजबूर हो जाएं।

मौके पर तैनात हवलदार पी. तिग्गा द्वारा काटा गया चालान, जांच व्यवस्था पर उठ रहे सवाल..

पूरे घटनाक्रम में मौके पर मौजूद विभागीय स्टाफ की भूमिका को लेकर भी चालक ने खुलकर बयान दिया है। चालक के अनुसार, जांच स्थल पर आरटीओ उड़नदस्ते के हवलदार पी. तिग्गा तैनात थे, जिन्होंने चालक द्वारा मांगी गई रकम देने में असमर्थता जताने के उपरांत वाहन का विधिवत चालान काटा। चालक का आरोप है कि अमले के निचले स्तर के कर्मचारी अक्सर उच्चाधिकारियों के निर्देशों की आड़ में सड़कों पर मनमानी करते हैं और भारी जुर्माने का डर दिखाकर चालकों को असहज स्थिति में डाल देते हैं। ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों का भी कहना है कि अंतरराज्यीय मार्गों पर चलने वाले वाहनों को कागजात पूर्ण होने के बावजूद कई तरह के तकनीकी पेंचों में उलझाया जाता है। जब चालक समझौते के लिए तैयार नहीं होते, तो उन पर मोटर व्हीकल एक्ट की तमाम कड़ी धाराएं जोड़कर भारी-भरकम राशि का चालान थमा दिया जाता है, जिससे ट्रांसपोर्टरों और चालकों दोनों की कमर टूट जाती है।

उड़नदस्ता प्रभारी का दो टूक जवाब: अवैध वसूली का आरोप मनगढ़ंत, नियम विरुद्ध पाए जाने पर हुई कानूनी कार्रवाई..

वाहन चालक द्वारा लगाए गए इन बेहद संगीन और चौंकाने वाले आरोपों पर जब रायगढ़ आरटीओ उड़नदस्ता प्रभारी से उनका पक्ष जाना गया, तो उन्होंने पूरे मामले को एक सिरे से भ्रामक, मनगढ़ंत और तथ्यहीन करार दिया। उड़नदस्ता प्रभारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है और अवैध वसूली अथवा धमकी देने जैसी कोई बात घटित नहीं हुई है। उन्होंने विभाग का पक्ष रखते हुए विस्तार से बताया कि उड़नदस्ता शासन द्वारा निर्धारित सड़क सुरक्षा मानकों, भार क्षमता (ओवरलोडिंग), वैध परमिट, फिटनेस तथा प्रदूषण संबंधी नियमों की नियमित और निष्पक्ष जांच करता है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान संबंधित मालवाहक वाहन में नियम विरुद्ध परिचालन और गंभीर विसंगतियां पाई गई थीं। कानून के दायरे में रहते हुए और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद ही मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नियमानुसार वैधानिक चालानी कार्रवाई की गई है। उड़नदस्ता प्रभारी ने यह भी कहा कि कई बार चालानी कार्रवाई और जुर्माने से बचने अथवा विभाग पर अनुचित दबाव बनाने के उद्देश्य से चालक इस प्रकार के मनगढ़ंत आरोपों का सहारा लेते हैं, जबकि विभाग केवल अपने कानूनी दायित्वों का निर्वहन कर रहा है।

सड़क सुरक्षा और उत्पीड़न के दावों के बीच फंसा सिस्टम, निष्पक्ष जांच की दरकार..

रायगढ़ जिले के इस ताजा मामले ने एक बार फिर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और सड़कों पर चलने वाले चालकों के बीच बढ़ते अविश्वास को सतह पर ला दिया है। एक तरफ जहां भारी वाहनों की नियमित निगरानी, ओवरलोडिंग पर अंकुश और शासन के राजस्व की सुरक्षा के लिए उड़नदस्ते की सक्रियता को अनिवार्य माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ लगातार सामने आने वाले ऐसे आरोप पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर दाग लगाते हैं। निष्पक्ष जांच और पारदर्शी प्रणाली ही इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने ला सकती है, ताकि न तो नियम तोड़ने वाले बच सकें और न ही सड़कों पर पसीना बहाने वाले किसी निर्दोष चालक का उत्पीड़न हो सके।