रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- शहर के जूटमिल थाना क्षेत्र अंतर्गत प्रगति नगर में हाल ही में उजाड़ी गई बस्ती की जमीन पर चल रहे निर्माण कार्य के दौरान भारी वाहनों की अंधी रफ्तार ने एक बार फिर खूनी तांडव मचा दिया है। निर्माण कार्य और मलबे की ढुलाई में लगे एक बेलगाम डंपर के चालक ने घोर लापरवाही का परिचय देते हुए सामने से आ रही स्कूटी सवार सिंधी समाज की महिला को सीधे अपनी चपेट में लेकर बेरहमी से कुचल दिया। टक्कर इतनी भीषण और भयावह थी कि दोपहिया वाहन पूरी तरह से कबाड़ के ढेर में तब्दील हो गया और महिला डंपर के पहियों की जद में आकर गंभीर रूप से जख्मी हो गई। आनन-फानन में स्थानीय नागरिकों की तत्परता से उन्हें शहर के मेट्रो अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक और नाजुक बनी हुई है। इस दिल दहला देने वाली दुर्घटना ने जहां पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है, वहीं दुर्घटनास्थल पर पहुंचे शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर के गैर-जिम्मेदाराना और संवेदनहीन रवैये ने आग में घी डालने का काम किया है।
चीखों से थर्राया प्रगति नगर, डंपर के नीचे पिस गई स्कूटी
प्रगति नगर में जिस बस्ती को हाल ही में प्रशासनिक स्तर पर हटाया गया था, वहां इन दिनों भारी मशीनरी, पोकलेन और अनगिनत डंपरों की ताबड़तोड़ आवाजाही के बीच विकास व समतलीकरण का कार्य धड़ल्ले से कराया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब सिंधी समाज की महिला अपनी स्कूटी पर सवार होकर सामान्य गति से इस मार्ग से गुजर रही थीं, तभी निर्माण सामग्री लेकर तेज रफ्तार में आ रहे डंपर चालक ने अंधाधुंध गति से वाहन चलाते हुए उन्हें सीधी टक्कर मार दी। डंपर का भारी-भरकम पहिया स्कूटी और महिला को रौंदते हुए आगे निकल गया, जिससे सड़क पर भयानक चीख-पुकार मच गई। दुर्घटना का मंजर इतना रोंगटे खड़े कर देने वाला था कि टक्कर के बाद स्कूटी के परखच्चे उड़ गए और वह धातु के मलबे में बदल गई, जबकि महिला के शरीर के कई हिस्सों में गंभीर फ्रैक्चर आए और गहरे जख्मों से सड़क खून से लाल हो गई।
मेट्रो अस्पताल में आईसीयू में सांसों की जंग, परिजनों में कोहराम
इस भीषण दुर्घटना के फौरन बाद आसपास के दुकानदार, राहगीर और बस्ती के नागरिक बिना किसी देरी के मौके पर दौड़ पड़े। महिला के शरीर से हो रहे अत्यधिक रक्तस्राव को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाई और आनन-फानन में उन्हें नजदीकी निजी मेट्रो अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार महिला के सिर, सीने, हाथ और पैरों में अंदरूनी और बाहरी दोनों तरह की प्राणघातक चोटें आई हैं। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उन्हें सघन चिकित्सा कक्ष यानी आईसीयू में रखकर उनकी जान बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है, हालांकि अत्यधिक खून बह जाने और कई गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण उनकी स्थिति अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही सिंधी समाज के प्रमुख पदाधिकारी और पीड़ित परिवार के लोग रोते-बिलखते बदहवास हालत में अस्पताल पहुंचे, जिससे पूरे अस्पताल परिसर में गमगीन और तनावपूर्ण माहौल निर्मित हो गया।
महापौर की घोर संवेदनहीनता: सिर्फ दूर से देखा और गाड़ी मोड़कर निकल गए
इस पूरे दर्दनाक हादसे के बीच सबसे शर्मनाक और जनभावनाओं को आहत करने वाला पहलू तब सामने आया, जब रायगढ़ नगर निगम के महापौर घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर मौजूद नागरिकों को उम्मीद थी कि शहर के प्रथम नागरिक होने के नाते वे घटनास्थल पर उतरेंगे, स्थिति की गंभीरता को समझेंगे, दोषी ठेकेदार व चालक पर तत्काल कार्रवाई के लिए प्रशासनिक अमले को कड़े निर्देश देंगे और सबसे बढ़कर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही महिला के परिजनों को ढांढस बंधाएंगे। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महापौर महोदय ने अपनी गाड़ी से नीचे उतरना तक गवारा नहीं समझा। वे घटनास्थल तक पहुंचे, केवल दूर से ही नजर दौड़ाई और अपनी गाड़ी मोड़कर बिना कुछ बोले वहां से सीधे रवाना हो गए।
एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के इस गैर-जिम्मेदाराना, उदासीन और पत्थरदिल रवैये को लेकर घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय नागरिकों और सिंधी समाज के लोगों में भारी गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का साफ कहना है कि जब एक निर्दोष महिला सड़क पर खून से लथपथ होकर तड़प रही थी और उसका परिवार सदमे में था, तब शहर के मुखिया का वहां रुककर घटना को समझने या परिजनों से उनके हाल-चाल और जख्मों का जिक्र तक न करना घोर शर्मनाक और निंदनीय है। जनप्रतिनिधियों का यह रवैया दर्शाता है कि सत्ता और पद पर बैठे लोगों के लिए आम जनता की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है।
डायल 112 मौके पर पहुंची, फरार चालक की तलाश में उलझा अमला
सड़क पर मची भारी अफरातफरी और आक्रोश के बीच स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देकर डायल 112 को बुलाया। सूचना मिलने पर पेट्रोलिंग टीम मौके पर तो पहुंची, लेकिन घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिस का अमला भी काफी देर तक असमंजस और सवालों में उलझा नजर आया। हादसे को अंजाम देने के बाद डंपर चालक भीड़ के गुस्से और कानून के डर से वाहन को बीच सड़क पर ही लावारिस छोड़कर मौके से रफूचक्कर हो चुका था। पुलिस कर्मी काफी देर तक प्रत्यक्षदर्शियों से इसी बात की तस्दीक करने में उलझे रहे कि ड्राइवर किस रास्ते से फरार हुआ है और घायल महिला को तत्काल किस अस्पताल ले जाया गया है।
बाद में जूटमिल थाना पुलिस ने दुर्घटना में शामिल भारी डंपर और चकनाचूर हो चुकी स्कूटी को अपने कब्जे में लेकर थाने भिजवाया। जूटमिल पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और दुर्घटनाग्रस्त वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर व ठेकेदार के माध्यम से फरार डंपर चालक की पहचान की जा रही है। पुलिस ने दावा किया है कि संभावित ठिकानों पर दबिश देकर आरोपी चालक को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उस पर मोटर व्हीकल एक्ट तथा लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने की सुसंगत धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नदारद: विकास के नाम पर कब तक बहेगा बेकसूरों का खून?
यह पूरा मामला भले ही पुलिसिया जांच और तकनीकी रिपोर्ट का विषय हो, लेकिन जमीनी हकीकत पर सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठता है कि जिस संवेदनशील इलाके में भारी तोड़फोड़ के बाद पुनर्निर्माण का काम चल रहा है, वहां आम नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था आखिर कहां गायब है? नियम और कायदों के अनुसार जहां भी भारी मशीनों और डंपरों से काम लिया जाता है, वहां राहगीरों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता बैरिकेडिंग, गति सीमा के चेतावनी बोर्ड और ट्रैफिक को डायवर्ट करने के लिए सुरक्षाकर्मियों या मार्शलों की अनिवार्य तैनाती होनी चाहिए। लेकिन प्रगति नगर में कार्य एजेंसी और नगर निगम ने सुरक्षा के इन बुनियादी मानकों को पूरी तरह से ताक पर रख दिया है, जिसके चलते भारी डंपर रिहायशी इलाकों में बिना किसी रोक-टोक के मौत बनकर दौड़ रहे हैं।
सिंधी समाज के प्रतिनिधियों और आक्रोशित स्थानीय नागरिकों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि नगर निगम और ठेकेदारों की मिलीभगत से चल रही इस लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घायल महिला के संपूर्ण इलाज का खर्च संबंधित निर्माण एजेंसी या नगर निगम वहन करे, लापरवाह ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज की जाए और रिहायशी क्षेत्रों में भारी वाहनों की रफ्तार पर तुरंत रोक लगाई जाए। यदि पुलिस और प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर फरार चालक को गिरफ्तार कर कड़े कदम नहीं उठाए, तो स्थानीय नागरिकों और समाज द्वारा सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा।
टिप्पणियाँ (0)
अपनी टिप्पणी लिखें