रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- रायगढ़ की औद्योगिक पट्टी में लंबे समय की खामोशी के बाद आखिरकार सेंट्रल जीएसटी ने एक बार फिर बड़ा प्रहार किया है। जोरापाली क्षेत्र स्थित एक बड़े औद्योगिक प्लांट में विभाग की विशेष जांच टीम ने अचानक दबिश देकर व्यापक छानबीन शुरू कर दी। प्राथमिक सूत्रों के मुताबिक, यह सख्त कदम भारी भरकम टैक्स चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के संदिग्ध क्लेम से जुड़े बड़े रैकेट के सुराग मिलने के बाद उठाया गया है। छापेमारी की खबर फैलते ही जिले के उद्योगपतियों और कारोबारी हल्कों में जबर्दस्त हलचल मच गई है।

घंटों चली सघन जांच, डिजिटल रिकॉर्ड्स और बिलिंग फाइल्स खंगाली गईं..

मंगलवार को सेंट्रल जीएसटी के वरिष्ठ अधिकारियों का दस्ता अचानक जोरापाली स्थित प्लांट परिसर में दाखिल हुआ और पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया। टीम ने तत्काल एकाउंट्स डिपार्टमेंट, बिलिंग सेक्शन और आईटी सर्वर रूम को सील कर दस्तावेजों की गहन पड़ताल शुरू की। बताया जा रहा है कि संबंधित फर्म की बिलिंग प्रणाली, बोगस सप्लाई और बैंक ट्रांजेक्शन पर विभाग पिछले काफी समय से पैनी नजर रखे हुए था। आईटीसी के नाम पर संदिग्ध लेन-देन के पुख्ता इनपुट मिलने के बाद ही यह कार्रवाई तय की गई। टीम के अफसर कई घंटों तक प्लांट के भीतर मौजूद रहे और लेजर बुक, ई-वे बिल सहित डिजिटल डेटा का बारीकी से मिलान करते रहे।

सख्त डिजिटल निगरानी के बावजूद जारी है फर्जीवाड़े का खेल..

टैक्स चोरी पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए सरकार ने सेंट्रल और स्टेट जीएसटी विभागों को व्यापक अधिकार सौंपे हैं। ई-इनवॉइसिंग, ई-वे बिल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिजिटल ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं ताकि राजस्व के हर नुकसान को तुरंत पकड़ा जा सके। इसके बावजूद रायगढ़ जैसे औद्योगिक केंद्र में फर्जी फर्मों के जरिए आईटीसी का अनुचित लाभ उठाने और वास्तविक उत्पादन व बिक्री में अंतर दिखाने का गोरखधंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है। जोरापाली की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि कागजी कंपनियों और फर्जी बिलिंग के सहारे राजस्व को चूना लगाने का नेटवर्क अब भी सक्रिय है।

कार्रवाई पर रहस्य का पर्दा और ‘सेटलमेंट’ के उठते सवाल..

कार्रवाई जितनी बड़ी और गंभीर नजर आ रही है, उतनी ही ज्यादा गोपनीयता विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े कर रही है। आमतौर पर आयकर विभाग, सीबीआई अथवा ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियां किसी भी बड़ी छापेमारी के बाद आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर बरामदगी और जब्ती के पुख्ता आंकड़े सार्वजनिक करती हैं। इसके विपरीत सेंट्रल और स्टेट जीएसटी महकमे ज्यादातर मामलों में चुप्पी साधे रहते हैं। जोरापाली प्लांट में घंटों चली इस बड़ी पड़ताल के बाद भी अफसरों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस रहस्यमयी खामोशी के चलते शहर के व्यापारिक गलियारों में पर्दे के पीछे ‘समझौते’ और मामले को दबाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस बार टैक्स चोरों पर कोई ठोस नजीर पेश करता है या फिर यह मामला भी पुरानी परंपरा की तरह ठंडे बस्ते में सिमट कर रह जाएगा।