रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार और लालफीताशाही ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है, लेकिन जब यह भ्रष्टाचार किसी आपदा पीड़ित या शोक संतप्त परिवार के दरवाजे पर दस्तक देता है, तो वह पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर कर देता है। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा और अमानवीयता का एक ऐसा ही स्तब्ध कर देने वाला मामला जिला रायगढ़ के कलेक्ट्रेट कार्यालय से सामने आया है। जहां राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा, जिसका मुख्य उद्देश्य पीड़ितों के आंसू पोंछना और उन्हें त्वरित सहायता प्रदान करना है, उसी शाखा का एक बाबू एक पीड़ित पति से उसकी मृत पत्नी के मुआवजे की राशि जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहा था। रिश्वतखोरी के इस सनसनीखेज मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी बाबू ने रिश्वत की रकम नकद में न मिलने पर बतौर गारंटी पीड़ित से पचास हजार रुपये का हस्ताक्षरित चेक ले लिया। भ्रष्टाचार के इतिहास में रिश्वत के लिए चेक को गारंटी के तौर पर बंधक बनाए जाने का यह अपनी तरह का पहला और बेहद गंभीर मामला है, जिसका एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) बिलासपुर की टीम ने आज सफलतापूर्वक पर्दाफाश कर दिया है।
दर्द पर मरहम की बजाय भ्रष्टाचार का दंश..
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत एक बेहद दुखद घटना से होती है। तहसील पुसौर के अंतर्गत आने वाले ग्राम बुलाकी के निवासी श्री विजय सिदार के जीवन में वर्ष 2023 एक मनहूस साया लेकर आया, जब सर्पदंश के कारण उनकी धर्मपत्नी रामकुमारी का असामयिक निधन हो गया। पत्नी के खोने के गहरे सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे विजय सिदार ने शासन की निर्धारित योजना के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि के लिए राजस्व विभाग का दरवाजा खटखटाया। यह मुआवजा राशि किसी भी पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ा आर्थिक संबल होती है, लेकिन सरकारी फाइलों की धीमी रफ्तार और उसमें बैठे भ्रष्ट नुमाइंदों की नीयत ने विजय के लिए इस राह को बेहद कंटीला बना दिया। उनका यह प्रकरण महीनों तक कलेक्ट्रेट कार्यालय रायगढ़ की राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा में धूल फांकता रहा। जब पीड़ित विजय सिदार ने अपने लंबित प्रकरण को लेकर इस शाखा के बाबू राजकुमार सिदार से संपर्क किया, तो उम्मीद थी कि उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन इसके उलट उन्हें सिस्टम के सबसे घिनौने चेहरे का सामना करना पड़ा।
रिश्वतखोरी का नया अध्याय: नकद नहीं, 'चेक' से गारंटी..
मुआवजा राशि को जल्द से जल्द पास कराने और उसे सीधे विजय सिदार के बैंक खाते में हस्तांतरित करने की एवज में बाबू राजकुमार सिदार ने अपनी भ्रष्ट नीयत जाहिर कर दी। उसने इस सरकारी काम के लिए सीधे तौर पर 50,000 रुपये की भारी भरकम रिश्वत की मांग रख दी। जब पीड़ित ने तुरंत इतनी बड़ी रकम नकद चुकाने में अपनी असमर्थता जताई, तो शातिर बाबू ने भ्रष्टाचार का एक ऐसा नया रास्ता निकाला जिसने जांच एजेंसियों को भी हैरत में डाल दिया। बाबू राजकुमार सिदार ने पीड़ित से कहा कि जब तक मुआवजा राशि खाते में नहीं आ जाती, तब तक के लिए उसे गारंटी के तौर पर 50,000 रुपये का एक हस्ताक्षरित (हस्ताक्षर किया हुआ) ब्लैंक चेक देना होगा। उसकी शर्त यह थी कि जैसे ही शासन की तरफ से मुआवजे की रकम विजय के खाते में आएगी, विजय को नकद पचास हजार रुपये लाकर देने होंगे और तब जाकर वह उसका चेक वापस करेगा। यह एक तरह से सरकारी तंत्र में बैठे एक कर्मचारी द्वारा किसी बेबस नागरिक का आर्थिक ब्लैकमेल था।
पीड़ित का साहसिक कदम और एसीबी का बिछाया जाल..
आम तौर पर लोग ऐसे मामलों में सिस्टम से हार मानकर भ्रष्ट अधिकारियों के आगे घुटने टेक देते हैं, लेकिन ग्राम बुलाकी के विजय सिदार ने इस अन्याय और अमानवीय मांग के आगे झुकने से साफ इंकार कर दिया। उन्होंने ठान लिया कि वह अपनी मृत पत्नी के हक़ के पैसों के लिए किसी भी भ्रष्ट बाबू की तिजोरी नहीं भरेंगे। अपने इसी दृढ़ निश्चय के साथ उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) बिलासपुर का रुख किया और बाबू राजकुमार सिदार की इस घिनौनी करतूत की लिखित शिकायत दर्ज कराई। एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को समझते हुए तत्काल शिकायत का गुपचुप तरीके से सत्यापन कराया। सत्यापन की प्रक्रिया में बाबू द्वारा रिश्वत मांगे जाने और बतौर गारंटी चेक मांगने की बात पूरी तरह से सत्य प्रमाणित हुई। शिकायत के सही पाए जाने के बाद एसीबी ने इस भ्रष्ट बाबू को रंगे हाथों पकड़ने की एक बेहद पुख्ता और रणनीतिक योजना तैयार की।
रंगे हाथों गिरफ्तारी और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप..
आज दिनांक 28 जुलाई 2026 को एसीबी बिलासपुर की विशेष टीम ने रायगढ़ कलेक्ट्रेट के उसी राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा के आस-पास अपना जाल बिछाया। योजना के मुताबिक, प्रार्थी विजय सिदार तयशुदा गारंटी के रूप में अपना हस्ताक्षरित चेक लेकर आरोपी बाबू राजकुमार सिदार के पास पहुंचे। जैसे ही पूर्ण रूप से आश्वस्त होकर बाबू राजकुमार सिदार ने उस 50,000 रुपये के चेक को अपने हाथ में लिया, वहां पहले से मुस्तैद एसीबी की टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथों दबोच लिया। एसीबी की इस अचानक हुई दबिश से कलेक्ट्रेट कार्यालय में भारी हड़कंप मच गया। जो बाबू कुछ देर पहले तक एक बेबस ग्रामीण को अपनी कुर्सी का रौब दिखा रहा था, वह एसीबी की गिरफ्त में आते ही बगलें झांकने लगा।
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह रिश्वतखोरी का एक बेहद अनूठा और दुस्साहसिक मामला है। अब तक रिश्वत के मामलों में नकद रकम की बरामदगी आम बात रही है, लेकिन बिना किसी नकद लेनदेन के, केवल भविष्य में रिश्वत सुनिश्चित करने के लिए गारंटी के रूप में हस्ताक्षरित चेक मांगना भ्रष्टाचार के बदलते और शातिर स्वरूप को दर्शाता है। एसीबी ने मौके पर ही सभी जरूरी कागजी कार्यवाही पूरी की और आरोपी से वह चेक बरामद कर लिया। आरोपी बाबू राजकुमार सिदार के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत कड़ा अपराध पंजीबद्ध कर आगे की वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
इस पूरी घटना ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि शासन और जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से काम कर रही हैं। आपदा राहत जैसे संवेदनशील विभाग में इस तरह की कार्रवाई से उन तमाम भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खौफ का माहौल है जो आम जनता की मजबूरी का फायदा उठाकर अपनी जेबें भरने में लगे रहते हैं। प्रार्थी विजय सिदार का यह साहसिक कदम उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल बन गया है जो सिस्टम के सताए हुए हैं। यह मामला चीख-चीख कर यह कह रहा है कि यदि नागरिक जागरूक होकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं, तो भ्रष्टाचार के कितने भी शातिर तरीके क्यों न ईजाद कर लिए जाएं, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं।
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