रायपुर@TAKKAR न्यूज :- छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने वाहन में निर्माण संबंधी गंभीर खामियों (मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त फैसला सुनाया है। आयोग ने अपने दिनांक 23 जुलाई 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि ग्राहकों को दोषपूर्ण वाहन बेचना सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। इस ऐतिहासिक निर्णय में, आयोग ने दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर 'नेशनल गैरेज' को संयुक्त रूप से दोषी ठहराते हुए, उपभोक्ता को कार की संपूर्ण खरीद राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने का कड़ा आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ता को हुई भारी वित्तीय हानि और मानसिक पीड़ा के लिए भी लाखों रुपये का मुआवजा बरकरार रखा गया है।
नई कार में शुरू से ही तकनीकी खामियों की भरमार..
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई थी जब शिकायतकर्ता श्री प्रमोद कुमार गौतम ने 27 नवंबर 2014 को एक नई टाटा इंडिगो ईसीएस एलएसटीडीआई कार खरीदी थी। एक नई कार से सुखद अनुभव की उम्मीद कर रहे ग्राहक को वाहन खरीदने के तुरंत बाद से ही गंभीर तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कार में शुरुआत से ही ईंधन गेज का खराब होना, चलते समय वाहन का एक ओर असामान्य रूप से खिंचना और इंजन के ठंडे होने पर स्टार्ट न होने जैसी गंभीर खामियां सामने आने लगीं। स्थिति इतनी बदतर थी कि मात्र तीन महीने और 5000 किलोमीटर चलने के भीतर ही उपभोक्ता को अपनी नई कार मरम्मत के लिए चार बार सर्विस सेंटर ले जानी पड़ी। इन निरंतर तकनीकी समस्याओं से त्रस्त होकर और भारी मानसिक तथा आर्थिक नुकसान झेलने के बाद, श्री गौतम ने अंततः 13 अप्रैल 2015 को जिला उपभोक्ता आयोग, रायपुर के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया और न्याय की गुहार लगाई।
निर्माता और डीलर ने झाड़ा पल्ला, जिला आयोग का आया था ये फैसला..
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान डीलर नेशनल गैरेज और निर्माता टाटा मोटर्स दोनों ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने का पूरा प्रयास किया। डीलर नेशनल गैरेज का तर्क था कि सभी शिकायतें वारंटी अवधि के अंतर्गत ठीक कर दी गई थीं और वाहन में कोई स्थायी निर्माण दोष नहीं था, इसलिए वाहन सामान्य रूप से उपयोग योग्य था। वहीं, टाटा मोटर्स ने भी इन गंभीर आरोपों को अस्वीकार करते हुए यह दावा किया कि ये समस्याएं केवल सामान्य रखरखाव और घिसावट (wear and tear) का परिणाम थीं, न कि कोई निर्माण दोष। इस पर जिला आयोग ने 16 अप्रैल 2025 को अपने आदेश के माध्यम से शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए डीलर को निर्देश दिया था कि वह वाहन को 'जैसी है' स्थिति में 45 दिनों के भीतर ग्राहक को सौंपे। इसके साथ ही, 2,00,000 रुपये वित्तीय हानि और 10,000 रुपये मानसिक पीड़ा हेतु संयुक्त रूप से क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया गया था, जिसे 45 दिनों में न चुकाने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होना था। साथ ही 5,000 रुपये वकील शुल्क एवं वाद व्यय भी तय किया गया था।
कबाड़ बन चुकी कार को 'जैसा है' सौंपना अव्यावहारिक: राज्य आयोग..
यह मामला जब अपील के माध्यम से राज्य उपभोक्ता आयोग पहुंचा, तो परिदृश्य पूरी तरह बदल गया और उपभोक्ता को बड़ी राहत मिली। अपील की सुनवाई करते हुए राज्य आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री गौतम चौरड़िया और माननीय सदस्य श्री प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने मामले के हर पहलू की गहनता से जांच की। राज्य आयोग ने स्पष्ट रूप से यह पाया कि उपभोक्ता द्वारा खरीदी गई टाटा इंडिगो कार में खरीद के तुरंत बाद गंभीर तकनीकी दोष उत्पन्न हुए और सर्विस सेंटर इन दोषों को दूर करने में पूरी तरह विफल रहा। पीठ ने जिला आयोग के फैसले पर एक बेहद तार्किक और कड़ी टिप्पणी करते हुए रेखांकित किया कि वर्तमान में यह वाहन अब उपयोग के लायक बिल्कुल नहीं बचा है और कबाड़ की स्थिति में पड़ा है। ऐसे में उपभोक्ता को "जैसा है" की स्थिति में एक कबाड़ वाहन सौंपना न तो व्यावहारिक कदम है और न ही इससे न्याय का कोई सार्थक उद्देश्य पूरा होता है।
उपभोक्ता के हक में ऐतिहासिक निर्णय, ब्याज सहित संपूर्ण राशि वापसी का फरमान..
इन्हीं ठोस तथ्यों और तर्कों के आधार पर राज्य उपभोक्ता आयोग ने निर्माता टाटा मोटर्स लिमिटेड और अधिकृत डीलर नेशनल गैरेज दोनों की संयुक्त जवाबदेही तय करते हुए उन्हें दोषी ठहराया। आयोग ने जिला आयोग के आदेश में बड़ा संशोधन करते हुए अपना अंतिम फैसला सुनाया और निर्देश दिया कि दोनों प्रतिवादी संयुक्त रूप से उपभोक्ता को वाहन की पूरी खरीद राशि 4,77,865 रुपये (रुपये चार लाख सतहत्तर हजार आठ सौ पैंसठ मात्र) 27.11.2014 की बिक्री रसीद के अनुसार वापस करें। यह पूरी राशि शिकायत की तिथि 13 अप्रैल 2015 से अदायगी तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटानी होगी। इसके अतिरिक्त, 2,00,000 रुपये की भारी वित्तीय हानि की क्षतिपूर्ति और 10,000 रुपये का मानसिक पीड़ा का मुआवजा भी यथावत रखा गया है, जो पूर्व में तय किया गया था। कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में जिला आयोग द्वारा निर्धारित 5,000 रुपये का वकील शुल्क एवं वाद व्यय भी उपभोक्ता को अलग से देय होगा। छ.ग. राज्य उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि दोषपूर्ण वाहन की बिक्री उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापार व्यवहार एवं सेवा में कमी है, जिसके लिए निर्माता एवं डीलर दोनों संयुक्त रूप से उत्तरदायी हैं।
टिप्पणियाँ (0)
अपनी टिप्पणी लिखें