रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कहे जाने वाले एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का गुस्सा अब सड़क पर पूरी तरह से फूट पड़ा है। राज्य के मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। डॉक्टरों का साफ और कड़क शब्दों में कहना है कि वे रोजाना 24 से 30 घंटे तक अस्पताल के वॉर्ड, ओपीडी, इमरजेंसी, और जीवनरक्षक इकाइयों जैसे रामबाड़ा तथा पुसौर में अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा के साथ देते हैं, लेकिन इसके बदले में मिलने वाला मेहनताना (स्टाइपेंड) आज के महंगाई के दौर में एक क्रूर मजाक जैसा है। इंटर्न डॉक्टरों के अनुसार उन्हें प्रतिदिन मात्र 530 रुपए के हिसाब से महीनेभर का कुल 15,900 रुपए स्टाइपेंड मिलता है, जो उनके अमानवीय परिश्रम और पसीने की कीमत के आगे बेहद नगण्य और अपमानजनक है।
अम्बेडकर चौक से गांधी पुतला तक निकाली विशाल पदयात्रा, प्रशासन और शासन पर सुस्ती का करारा प्रहार..
अपनी जायज मांगों को मनवाने के लिए डॉक्टरों ने केवल कागजी लड़ाइयां लड़ने के बजाय अब सीधे सड़कों पर हुंकार भर दी है। इसी क्रम में डॉक्टरों ने अम्बेडकर चौक से लेकर गांधी पुतला तक एक उग्र और आक्रोशित पदयात्रा निकाली, जो लगभग दो से तीन किलोमीटर लंबी थी। इस पदयात्रा का एकमात्र उद्देश्य शासन-प्रशासन के बहरे कानों तक अपनी आवाज को पहुंचाना और यह जताना था कि यह संघर्ष सिर्फ चंद लोगों का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के चिकित्सा समुदाय के स्वाभिमान की लड़ाई है। हाथों में विरोध प्रदर्शन की तख्तियां और बैनर थामे इन डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने अब भी संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो राज्य का स्वास्थ्य ढांचा पूरी तरह चरमरा जाएगा।
सिर्फ कोरे आश्वासन और लंबी होती प्रशासनिक सुस्ती से भड़का आक्रोश
आंदोलनकारी डॉक्टरों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि उन्हें केवल झूठे आश्वासनों की घुट्टी पिलाई जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री और तमाम जिम्मेदार अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकों के बावजूद धरातल पर परिणाम शून्य हैं। मंत्री स्तर पर स्टाइपेंड बढ़ाने के बड़े-बड़े वादे तो किए जाते हैं, लेकिन फाइलें लालफीताशाही में उलझकर रह जाती हैं। डॉक्टरों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर मामले को लटका रही है, जबकि उनका पूरा इंटर्नशिप कार्यकाल महज 12 महीनों का होता है, जिसमें से 3 महीने पहले ही बीत चुके हैं। यदि यही रफ्तार रही, तो बढ़ा हुआ स्टाइपेंड मिलने का लाभ भी उनके किसी काम का नहीं रहेगा।
स्थानीय विधायक और वित्त मंत्रालय से सीधी ललकार, ओ.पी. चौधरी की चुप्पी पर गहरा सवाल?
एमबीबीएस इंटर्न्स ने छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री और स्थानीय विधायक ओ.पी. चौधरी से दो-टूक शब्दों में गुहार लगाई है कि वे इस विकट परिस्थिति को समझें। डॉक्टरों का आरोप है कि लगातार प्रयासों के बावजूद उनकी आवाज अभी तक ओ.पी. चौधरी तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है और वहां से किसी भी प्रकार का ठोस आश्वासन नहीं मिला है। डॉक्टरों ने कड़े तेवर दिखाते हुए मांग की है कि वित्त मंत्री इस गंभीर मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करें और उनके स्टाइपेंड को तत्काल प्रभाव से 15,900 रुपए से बढ़ाकर 30,000 रुपए किया जाए, ताकि आर्थिक तंगी से जूझ रहे ये युवा डॉक्टर सुकून से अपनी सेवाएं दे सकें।
रोगी हित सर्वोपरि, लेकिन अब और शोषण बर्दाश्त नहीं..
डॉक्टरों ने दो-टूक कहा कि उनकी हड़ताल से आम जनता और मरीजों को हो रही दिक्कतों का उन्हें गहरा खेद है, क्योंकि वे खुद नहीं चाहते कि किसी मरीज की जान जोखिम में पड़े। लेकिन मजबूरन उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है क्योंकि सरकार का रवैया उनके प्रति पूरी तरह संवेदनहीन रहा है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि जब तक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का लिखित और पुख्ता आदेश सामने नहीं आता, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन संग्राम और अधिक आक्रामक रूप लेता रहेगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कुंभकर्णी नींद में सो रही सरकार कब इन युवा डॉक्टरों के आक्रोश को भांपकर ठोस कदम उठाती है।
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