रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- एक तरफ देश भर में सड़क हादसों को कम करने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के नियमों को सख्त किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ रायगढ़ जिले का परिवहन कार्यालय (आरटीओ) अपने अजब-गजब कारनामों के चलते चर्चा का केंद्र बन गया है। यहां ड्राइविंग लाइसेंस के लिए दिया जाने वाला ट्रायल एक मजाक बनकर रह गया है। बीते कई सालों से विभाग सिर्फ ट्रायल ट्रैक बनाने का खोखला आश्वासन दे रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक कोई पक्का ट्रैक अस्तित्व में ही नहीं आ सका है। सबसे बड़ा और हैरान करने वाला सवाल यह है कि जब ट्रैक बना ही नहीं है, तो आखिर सालों से अधिकारी ट्रायल ले किस पर रहे हैं? जमीनी हकीकत यह है कि रायगढ़ में लोग डामर या कंक्रीट के ट्रैक पर नहीं, बल्कि मिट्टी और कीचड़ के बीच गाड़ी चलाकर अपना ड्राइविंग लाइसेंस हासिल कर रहे हैं।

हवा-हवाई वादों के बीच कीचड़ में हो रहा 'टेस्ट'

परिवहन कार्यालय का ट्रायल ट्रैक पिछले कई सालों से सिर्फ फाइलों और अधिकारियों के आश्वासनों में ही बन रहा है। लगभग डेढ़ साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन ट्रैक निर्माण का कार्य आज भी कछुआ चाल से चल रहा है, या यूं कहें कि सिर्फ दिखावे के लिए चल रहा है। अधिकारी लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ट्रैक का काम प्रगति पर है और जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा। लेकिन जब मौके पर जाकर हकीकत परखी गई, तो अधिकारियों के दावों की पोल खुल गई। जिस जगह पर ट्रायल लेने का दावा किया जा रहा है, वहां ट्रैक के नाम पर सिर्फ रेत, मिट्टी और दलदल नुमा कीचड़ मौजूद है। ऐसे में यह समझना मुश्किल नहीं है कि इस कच्ची और उबड़-खाबड़ जमीन पर आखिर किस नियम के तहत ड्राइविंग टेस्ट की खानापूर्ति की जा रही है।

परिवहन अधिकारी गौरव साहू के अजीबोगरीब तर्क

इस पूरे मामले में जब रायगढ़ के परिवहन अधिकारी (आरटीओ) गौरव साहू से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनका जवाब उनके विभाग की कार्यप्रणाली से भी ज्यादा हैरान करने वाला था। उन्होंने बेहद हल्के अंदाज में कह दिया कि वे इसी जगह पर ही ट्रायल लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा पास और फेल ट्रायल के बाद किया जाता है, टेस्ट लेने के बाद। एक जिम्मेदार अधिकारी का यह बयान सीधे तौर पर परिवहन विभाग की नियमावली पर तमाचा है। क्या मोटर व्हीकल एक्ट में यह लिखा है कि आधुनिक ट्रायल ट्रैक की गैरमौजूदगी में कीचड़ और रेत पर टेस्ट लेकर लाइसेंस बांट दिए जाएं? क्या इस पूरी प्रक्रिया की कोई वीडियोग्राफी की जा रही है, जो यह साबित कर सके कि टेस्ट निष्पक्ष तरीके से लिया गया है? इन सवालों पर अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं।

हजारों लाइसेंस सवालों के घेरे में, जानमाल के साथ हो रहा खिलवाड़

अब तक इस कीचड़ वाले 'जुगाड़ ट्रैक' से टेस्ट देकर न जाने कितने ही लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस बांटे जा चुके हैं। जो लोग बिना किसी वैज्ञानिक और निर्धारित मापदंड वाले ट्रैक के टेस्ट देकर सड़कों पर उतर रहे हैं, क्या वे सड़क सुरक्षा के मानकों पर खरे उतरते हैं? यह सीधा-सीधा आम जनता की जानमाल के साथ खिलवाड़ है। अगर यह प्रक्रिया नियम के विरुद्ध है, तो अब तक जारी किए गए हजारों लाइसेंस की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। क्या उन सभी चालकों का भविष्य अंधकार में नहीं है, जिन्हें एक त्रुटिपूर्ण प्रणाली के तहत लाइसेंस थमा दिया गया है?

उच्च स्तरीय जांच की दरकार

रायगढ़ परिवहन कार्यालय का यह रवैया न सिर्फ सरकारी सिस्टम की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे नियमों को ताक पर रखकर एक पूरी व्यवस्था चलाई जा रही है। बिना उचित ट्रैक के, बिना वीडियोग्राफी के और केवल अधिकारियों की मनमर्जी से कीचड़ में ट्रायल लेकर लाइसेंस बांटना एक गंभीर लापरवाही है। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन और राज्य का परिवहन मंत्रालय इस मामले में कोई संज्ञान लेता है, या फिर रायगढ़ की सड़कों पर कीचड़ में पास हुए ड्राइवर हादसों को न्योता देते रहेंगे। समय आ गया है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।