रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- पूरे देश और कई राज्यों को अपनी बिजली से रोशन करने वाला रायगढ़ जिला आज खुद बिजली विभाग के निकम्मेपन और प्रशासनिक लापरवाही के घुप अंधेरे में घुट रहा है। यह रायगढ़ के मुंह पर एक करारा तमाचा है कि जिस शहर के सीने पर बैठकर पॉवर प्लांट कोयला फूंक रहे हैं, उसी शहर की जनता जरा सी हवा चलने या बारिश की चंद बूंदें गिरने पर घंटों के अघोषित का संताप झेल रही है। बिजली विभाग का तंत्र इस कदर सड़ चुका है कि मौसम विभाग के अलर्ट से पहले ही CSPDCL के तार और खंभे जवाब दे जाते हैं।

आखिर रायगढ़ के बिजली विभाग में चल क्या रहा है? हर साल मेंटेनेंस के नाम पर जो करोड़ों का बजट पास होता है, क्या वह सिर्फ फाइलों में खपाया जा रहा है या फिर अधिकारियों की जेबें गर्म कर रहा है? अगर वाकई ईमानदारी से मेंटेनेंस होता है, तो हवा के एक मामूली झोंके से शहर की बत्ती गुल कैसे हो जाती है? विभाग हर बार कर्मचारियों की कमी का रोना रोकर अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश करता है। अगर लाइनमैन और टेक्निकल स्टाफ का इतना ही अकाल है, तो विभाग नई भर्तियां क्यों नहीं करता? और यदि ऊपर से फंड या स्टाफ नहीं आ रहा है, तो एयर कंडीशनर कमरों में बैठे बड़े अफसर इसके खिलाफ आवाज उठाने से क्यों कतराते हैं? क्या उनकी रीढ़ की हड्डी गायब हो चुकी है या फिर उन्हें सिर्फ अपनी मलाईदार कुर्सी और वेतन से मतलब है?

आज रायगढ़ की त्रस्त जनता कभी सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर है, तो कभी सोशल मीडिया और न्यूज ग्रुप्स पर अपनी भड़ास निकाल रही है। लेकिन 'सफेद हाथी' बन चुके इन अधिकारियों की चमड़ी इतनी मोटी हो चुकी है कि उन पर जनता के आक्रोश का कोई असर नहीं पड़ता। जब कोई उपभोक्ता बेतहाशा गर्मी और अंधेरे से परेशान होकर विभाग के अफसरों को फोन लगाता है, तो निहायत ही बेशर्मी से रटा-रटाया ज्ञान दे दिया जाता है कि 'आप टेंशन मत लो, लाइन में फॉल्ट है, काम चल रहा है, बिजली आ जाएगी।' साहब, यह 'काम चल रहा है' का खोखला जुमला सुनते-सुनते रायगढ़ के लोगों के कान पक चुके हैं।

जनता अब सीधा और तीखा सवाल पूछ रही है कि जब हर महीने मीटर की रीडिंग लेकर अनाप-शनाप बिल थमाने में विभाग एक दिन की भी देरी नहीं करता, तो घंटों तक बिजली ठप रहने पर उपभोक्ताओं को बिल में छूट क्यों नहीं दी जाती? क्या रायगढ़ के नागरिकों ने विभाग की लापरवाही का हर्जाना भरने का ठेका ले रखा है? यह अब महज एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों का खुला हनन है। वक्त आ गया है कि इस विभाग के लापरवाह अफसरों की जवाबदेही सख्ती से तय हो, वरना वो दिन दूर नहीं जब रायगढ़ का जनआक्रोश इन वातानुकूलित दफ्तरों का ही घेराव कर देगा और तब 'टेंशन मत लो' कहने वाले अफसरों के पास जवाब देते नहीं बनेगा।